झारखंड विधानसभा: लंबित मामलों के लिए ‘इमरजेंसी सेल’ बनाने की सिफारिश, शिक्षक तबादले मामलों का निपटारा
रांची: झारखंड विधानसभा की सरकारी आश्वासन समिति ने वर्ष 2010 से लंबित चले आ रहे सरकारी आश्वासनों की समीक्षा के बाद अपने 50वें, 51वें और 52वें प्रतिवेदन की प्रतियां विधानसभा अध्यक्ष रवीन्द्र नाथ महतो को सौंप दी हैं। समिति के सभापति अरूप चटर्जी, सदस्य कुमार उज्ज्वल तथा सदस्या ममता देवी ने अध्यक्ष से मुलाकात कर रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस अवसर पर विधायक उदय शंकर सिंह भी उपस्थित रहे।
यह प्रतिवेदन सदन में मंत्रियों द्वारा दिए गए आश्वासनों के क्रियान्वयन की समीक्षा पर आधारित है। रिपोर्ट तैयार करने के लिए समिति ने अब तक कुल 14 बैठकें आयोजित की हैं, जिनमें 08 विभागीय और 06 समीक्षात्मक बैठकें शामिल हैं। इन बैठकों में संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ लंबित मामलों की प्रगति की समीक्षा करते हुए उनके शीघ्र निष्पादन पर बल दिया गया।
* लंबित मामलों के लिए ‘इमरजेंसी सेल’ बनाने की सिफारिश
समिति ने अपने प्रतिवेदन में सरकार को कुल चार मुख्य अनुशंसाएं सौंपी हैं। समिति का मानना है कि लंबित आश्वासनों के पूरा होने से लोकहित के विषय स्वतः हल हो जाते हैं, इसलिए सरकार को इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए। इसके साथ ही बैठकों में दिए गए निर्देशों का राज्यहित में अक्षरशः पालन सुनिश्चित करने और लंबित मामलों के त्वरित क्रियान्वयन के लिए एक अलग ‘इमरजेंसी सेल’ के गठन का सुझाव दिया गया है।
* पेजजल, शिक्षक तबादले और कॉलेज से जुड़े मामलों का निपटारा
समिति की पहल से कई लंबे समय से अटके जनहित के मामलों में प्रगति हुई है। शिक्षा विभाग के अंतर्गत झरिया के जामाडोबा स्थित उर्दू मध्य विद्यालय में पाइपलाइन के माध्यम से नियमित पेयजल आपूर्ति शुरू करा दी गई है। प्राथमिक शिक्षकों के अंतर-जिला स्थानांतरण के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया अपनाकर कई शिक्षकों का तबादला किया गया है। इसके अतिरिक्त, जामताड़ा जिला स्थित वेटरनरी कॉलेज से संबंधित लंबित मामले में भी आवश्यक कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई पूरी कर ली गई है।
* सुशासन और जनविश्वास के लिए समयबद्ध कार्रवाई जरूरी: अरूप चटर्जी
समिति के सभापति अरूप चटर्जी ने कहा कि समिति के समक्ष आश्वासनों की लंबी सूची थी, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों के सहयोग से अधिकांश मामलों का निष्पादन करने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकारी आश्वासनों का समयबद्ध क्रियान्वयन सुशासन और जनविश्वास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
