कोडरमा में 99% युवाओं ने माना: लगातार गंभीर हो रही बेरोजगारी की समस्या, शिक्षा की स्थिति भी चिंताजनक, सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा!
पढ़-लिखकर भी बेकार!’: कोडरमा में 3500 युवाओं पर हुए सर्वे पढ़ें पूरी रिपोर्ट
कोडरमा:शिक्षक दिवस के अवसर पर एम. आर. ग्लोबल स्कूल, चाराडीह में भारत ज्ञान विज्ञान समिति, कोडरमा की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। सुश्री शिल्पी सिंह की अध्यक्षता और जिला सचिव अनिल कुमार के संचालन में हुई इस बैठक में कोडरमा जिले के 3500 युवाओं पर किए गए ‘बेरोजगारी सर्वेक्षण’ की रिपोर्ट जारी की गई। रिपोर्ट के अनुसार, 99 प्रतिशत से अधिक युवाओं का मानना है कि समय के साथ देश में बेरोजगारी की स्थिति लगातार बदतर होती जा रही है। बैठक में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित ज्ञान-विज्ञान आंदोलन के राज्य नेतृत्वकर्ता अशीम सरकार ने कहा कि वर्तमान में सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था संकट के दौर से गुजर रही है। शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनाने के बजाय उसका व्यवसायीकरण किया जा रहा है। उन्होंने महान परमाणु वैज्ञानिक एम. पी. परमेश्वरन के जीवन और विचारों पर प्रकाश डालते हुए समाज को अंधविश्वास और रूढ़िवादिता से मुक्त कराने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तर्कशीलता के विस्तार का संकल्प दिलाया।
समिति के जिला अध्यक्ष राम रतन अवध्या द्वारा प्रस्तुत बेरोजगारी सर्वेक्षण रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त-सितंबर 2025 के दौरान 45 स्वयंसेवी कार्यकर्ताओं की मदद से लगभग 3500 युवाओं का डेटा एकत्र किया गया। सर्वेक्षण में शामिल युवाओं में 83 प्रतिशत पुरुष और 16.7 प्रतिशत महिलाएं थीं, जिनकी औसत आयु 27 वर्ष रही। रिपोर्ट में सामने आया कि 47 प्रतिशत शिक्षित (स्नातक या स्नातकोत्तर) युवाओं में से 82 प्रतिशत रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं। भविष्य में अच्छा रोजगार मिलने की संभावना को लेकर केवल 7 प्रतिशत युवा ही पूरी तरह आशावादी दिखे, जबकि 43 प्रतिशत ने संभावना को ‘बहुत कम’ और 18 प्रतिशत ने ‘न के बराबर’ बताया।
सर्वेक्षण में युवाओं ने बेरोजगारी के कारणों के लिए केंद्र सरकार की नीतियों (52.7%), राज्य सरकार की नीतियों (55%) और खराब प्रशासनिक व्यवस्था (54%) को मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया। इसके अलावा संसाधनों की कमी और कौशल का अभाव भी बड़े कारण बताए गए।स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन के उपायों पर युवाओं ने कृषि (72%), कृषि आधारित उद्योगों (55.6%) और कुटीर उद्योगों (55%) में सबसे ज्यादा संभावनाएं जताईं। वहीं स्वरोजगार शुरू करने के लिए 88.7 प्रतिशत युवाओं ने पूंजी की उपलब्धता को प्राथमिक आवश्यकता करार दिया।समिति ने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की है कि कोडरमा जैसे जिलों के लिए स्थानीय संसाधनों पर आधारित विशेष कार्ययोजना बनाई जाए। केवल सरकारी नौकरियों के भरोसे रहने के बजाय छोटे उद्योगों, असंगठित क्षेत्र और युवा उद्यमिता को ठोस आर्थिक नीति का हिस्सा बनाने की जरूरत है। कार्यक्रम के अंत में सर्वेक्षण में योगदान देने वाले सभी 45 सर्वेयरों को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया तथा आगामी स्कूल सर्वेक्षण को प्रभावी ढंग से लागू करने पर चर्चा की गई। बैठक में बालेश्वर राणा, दिनेश रविदास, सिकंदर रजक, शशि कला, सुरेंद्र यादव सहित समिति के कई सदस्य उपस्थित रहे।
