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झारखंड में मौसम का महाप्रलय: टूटा 25 वर्षों का रिकॉर्ड! गिरिडीह के जमुआ समेत कई जिलों में भीषण ओलावृष्टि, 50 KM की रफ्तार से चली हवाओं ने मचाई तबाही।

मौसम विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग ने जारी किया अलर्ट, खेतों में बिछी ओलों की सफेद चादर, फसलों को भारी नुकसान।

जमुआ (गिरिडीह): झारखंड के गिरिडीह जिले सहित जमुआ और आसपास के इलाकों में आज मौसम ने रौद्र रूप धारण कर लिया। भीषण गर्मी के बीच अचानक बदले मिजाज ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली धूलभरी आंधी और मूसलाधार बारिश के साथ हुई जबरदस्त ओलावृष्टि ने पूरे इलाके को सफेद चादर से ढक दिया।

कुदरत का ‘सफेद’ कहर जमुआ प्रखंड के कई गांवों में ओलावृष्टि इतनी भीषण थी कि सड़कें और खेत बर्फबारी जैसा अहसास कराने लगे। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, पिछले कई दशकों में ऐसी तीव्र ओलावृष्टि नहीं देखी गई थी। लगभग 25 सालों बाद इस तरह की ओलावृष्टि देखी गई है। कुछ ही मिनटों के भीतर जमीन पर ओलों की मोटी परत जमा हो गई, जिससे तापमान में तो गिरावट आई, लेकिन तबाही के निशान पीछे छूट गए।

किसानों की कमर टूटी: फसलों को भारी नुकसान यह आपदा उस समय आई है जब किसान रबी की फसल (गेहूं) की कटाई की तैयारी में थे। फसलों का नुकसान: ओलों की चोट से गेहूं, दलहन और सब्जियों की फसलें पूरी तरह बर्बाद होने की कगार पर हैं।

महुआ सीजन प्रभावित: झारखंड के ग्रामीण इलाकों में यह महुआ चुनने का प्रमुख समय है, लेकिन तेज हवा और ओलों ने महुआ के फूलों को भारी नुकसान पहुँचाया है, जिससे गरीब ग्रामीणों की आजीविका पर संकट मंडरा रहा है। मौसम विभाग और आपदा प्रबंधन का अलर्टरांची स्थित आपदा प्रबंधन विभाग (Disaster Management Department) ने पहले ही चेतावनी जारी की थी। विभाग के अनुसार:”अगले 3 घंटों के भीतर बोकारो, देवघर, धनबाद, गिरिडीह, खूंटी, रामगढ़ और पश्चिमी सिंहभूम जिलों के कुछ स्थानों पर 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली सतही हवाओं के साथ हल्की गर्जना और बारिश होने की प्रबल संभावना है।

“सावधानी बरतने की अपील प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें। पेड़ों के नीचे शरण न लें और बिजली के खंभों से दूर रहें।

Aaina Plus की टीम इस समय ग्राउंड जीरो पर मौजूद है और हम लगातार किसानों और स्थानीय प्रशासन से संपर्क कर नुकसान का जायजा ले रहे हैं। इस प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान की भरपाई के लिए सरकार और प्रशासन को जल्द से जल्द सर्वे कराकर मुआवजे की घोषणा करनी चाहिए।

रिपोर्ट: पंकज कुशवाहा, संस्थापक – आईना प्लस (Aaina Plus)

लोकेशन: जमुआ, गिरिडीह

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