मरांग बुरु की वो जमीन हमारी थी, हमारी है और हमारी रहेगी। मधुबन बाहा बोंगा पर्व में गरजे मंत्री सुदिव्य कुमार
मरांग बुरु का संघर्ष जारी रहेगा : मंत्री
पीरटांड़ |गिरिडीह : मधुबन के मरांग बुरु स्थल में आयोजित ‘मरांग बुरु जुग जाहेर बाहा बोंगा’ उत्सव 20 फरवरी 2026 को पूरी श्रद्धा और पारंपरिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ।
पारंपरिक रीति-रिवाजों से हुआ अनुष्ठान
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक संथाली विधि-विधान के साथ हुई। इस अवसर पर पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार ने मांझी थान में पूजा-अर्चना की और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त किया।

हजारों की संख्या में उमड़ी जनसैलाब के बीच मंत्री सुदिव्या कुमार आक्रमक तेवर में नज़र आए. श्री मंत्री ने सभा को संबोधित करते हुए कहा मरांग बुरु के आशीर्वाद से दो बार हमको विधायक बनने का मौका मिला , दूसरी बार जब विधायक बने और साथ में पर्यटन मंत्री भी बने और जब पर्यटन मंत्री बने तब महसूस हुआ बाहा परब की व्यवस्था जरा अच्छे से होनी चाहिए। पिछले साल हमलोगों ने अच्छे से व्यवस्था कराई, उससे ज्यादा बढ़िया व्यवस्था इसबार कराए हैं। मरांग बुरु की कृपा से और बेहतर व्यवस्था होगा।
सभा को संबोधित करते हुए आगे कहा कि मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन कहते हैं कि संस्कृति बचाने के लिए, धर्म बचाने के लिए और अपने धार्मिक स्थान को बचाने के लिए जिस हैसियत से लड़ना होगा, उस हैसियत से लड़ेंगे और बचा के रखेंगे।
उन्होंने कड़े लहजे में कहा कि हमलोगों को हमारी जमीन से बेदखल नहीं कर सकते हो, वो जमीन हमारी है, हमारे पूर्वजों की है उससे बेदखल करने का अधिकार आपको नहीं है। वो जमीन हमारी थी, हमारी है और हमारी रहेगी। उन्होंने अंत में ‘मरांग बुरु ओकोया’ के जोरदार नारों के साथ अपनी बात को समाप्त किया।

विधायक घाटशिल सोमेश चंद्र सोरेन ने कहा कि ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलता है। उन्होंने सभी ग्रामीणों से आह्वान किया कि वे प्रकृति के संरक्षण और सामाजिक समरसता को बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाएं। साथ ही राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त, फागु बेसरा ने मरांग बुरु से क्षेत्र की उन्नति और सुख-शांति की प्रार्थना की तथा एक-दूसरे को बाहा बोंगा की शुभकामनाएं दी। कहा कि मरांग बुरु और जाहेर आयो की पूजा संथाल आदिवासी समाज की आस्था का केंद्र है। बाहा बोंगा पर्व प्रकृति, नवजीवन और फूलों के उत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व मानव और प्रकृति के बीच गहरे संबंध को दर्शाता है। इस दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही योजनाओं की प्रगति सुनिश्चित की जाए और आम जनता को योजनाओं का लाभ समय पर मिले।
वहीं उपायुक्त, रामनिवास यादव ने सभी को मरांग बुरु जुग जाहेर बाहा बोंगा के पावन अवसर पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आदिवासी समाज की संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण, पारंपरिक स्थलों के विकास तथा युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उपायुक्त ने कहा कि बाहा बोंगा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को संगठित करने और सामूहिक चेतना को सशक्त बनाने का अवसर है।
कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक नृत्य-गान का भी आयोजन किया गया, जिसमें महिलाओं और युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

इस अवसर पर क्षेत्र के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी चर्चा की गई।
“मरांग बुरु और जाहेर आयो की आराधना संताल समाज की प्राचीन और गौरवशाली परंपरा है। बाहा बोंगा पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि यह प्रकृति संरक्षण और सामूहिक सद्भाव का वैश्विक संदेश देता है।”
मौके पर अपर समाहर्ता, सभी अनुमंडल पदाधिकारी, गिरिडीह जिला, जिला नजारत उप समाहर्ता, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचलाधिकारी पीरटांड़ समेत अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

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