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झारखंड बजट 2026-27: ₹1.58 लाख करोड़ का ‘अबुआ दिशोम बजट’, महिलाओं और शिक्षा पर सबसे बड़ा दांव

रांची: झारखंड विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने ₹1,58,560 करोड़ का भारी-भरकम बजट पेश किया है। इसे ‘अबुआ दिशोम बजट‘ (हमारा अपना बजट) का नाम देते हुए सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस बार का केंद्र बिंदु ‘आधी आबादी’, युवा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था है। पिछले वर्ष की तुलना में बजट के आकार में 9% की बढ़ोतरी की गई है।

बजट की 7 सबसे बड़ी घोषणाएं

1. महिला सशक्तिकरण: ₹22,995 करोड़ का मास्टर प्लानसरकार ने इस बजट का सबसे बड़ा हिस्सा महिला एवं बाल विकास विभाग को समर्पित किया है।

मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना: इसके लिए ₹14,065 करोड़ का भारी आवंटन किया गया है। मंईयां उद्यम योजना: स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए महिलाओं को ₹20,000 तक का आसान लोन दिया जाएगा।

2. ‘महिला किसान वर्ष’ और खुशहाली योजना : वर्ष 2026 को ‘अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष’ के रूप में मनाया जा रहा है। इसके तहत ‘महिला खुशहाली योजना’ की शुरुआत की गई है, जिसका लक्ष्य 19 लाख महिला किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ना और उनकी आय बढ़ाना है।

3. शिक्षा: ‘पीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस’ का विस्तार शिक्षा क्षेत्र के लिए बजट का लगभग 11% यानी लगभग ₹18,816 करोड़ आवंटित किए गए हैं।राज्य में 100 नए पीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस खोले जाएंगे।छात्राओं के लिए 5 नए आवासीय विद्यालय बनाने का प्रस्ताव है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में ‘ड्रॉप-आउट’ दर को कम किया जा सके।

4. स्वास्थ्य: कैंसर और जांच सुविधाओं पर जोर₹7,990 करोड़ के स्वास्थ्य बजट में तकनीक और सुलभता पर ध्यान दिया गया है. सभी मेडिकल कॉलेजों में CT स्कैन की सुविधा अनिवार्य होगी।24 जिला अस्पतालों में मैमोग्राफी मशीनें (ब्रेस्ट कैंसर जांच) लगाई जाएंगी। राज्य में 750 अबुआ दवाखाना खोले जाने का लक्ष्य है। इसके माध्यम से लोगों में सस्ती एवं गुणवत्तापूर्ण दवा उपलब्ध कराई जाएगी। कैंसर के इलाज के लिए ₹200 करोड़ का विशेष कोष (Corpus Fund) बनाया गया है।

5. ग्रामीण विकास और PESA कानून की शक्ति : ग्रामीण विकास के लिए ₹12,346 करोड़ का प्रावधान है। सरकार ने PESA कानून के जरिए ग्राम सभाओं को सशक्त करने का वादा किया है। अब बालू घाटों के प्रबंधन और स्थानीय विकास योजनाओं में ग्रामीणों की सीधी भागीदारी होगी।

6. कृषि: नकदी फसलों का विस्तार : किसानों के लिए ‘नकदी फसल विकास एवं विस्तार योजना’ के तहत गन्ना, जूट और अन्य कमर्शियल फसलों के क्षेत्र को बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा, ताकि किसानों की निर्भरता केवल पारंपरिक खेती पर न रहे।

7. पर्यटन: वित्तीय वर्ष 2026-27 में पर्यटन के क्षेत्र में ग्लास ब्रिज,रोप वे, स्काईवॉक, सोलर वोट, फ्लोटिंग रेस्टोरेंट, कोयल व्यू प्वाइंट, ग्लास वॉच टावर इत्यादि कई स्थानों पर l एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

विश्लेषण: सामाजिक सुरक्षा बनाम रोजगार की चुनौतीसरकार का यह बजट पूरी तरह से ‘सोशल इंजीनियरिंग’ और ‘सोशल सिक्योरिटी’ पर आधारित दिखता है। ₹1.36 लाख करोड़ के कोयला रॉयल्टी बकाये का मुद्दा उठाकर राज्य सरकार ने केंद्र के पाले में भी गेंद डाल दी है।

हालांकि, जानकारों का मानना है कि बजट में बेरोजगारी भत्ते और नई नौकरियों के सृजन पर और अधिक स्पष्टता की आवश्यकता थी। विपक्ष ने भी इसे ‘चुनावी लोकलुभावन’ बजट करार दिया है।निष्कर्ष’अबुआ दिशोम बजट’ के जरिए झारखंड सरकार ने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचने की कोशिश की है। ‘मंईयां सम्मान’ और ‘महिला खुशहाली’ जैसी योजनाएं अगर धरातल पर सही ढंग से उतरती हैं, तो यह राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित हो सकती हैं।

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