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बेहतरीन अर्थव्यवस्था में झारखंड ने गुजरात को छोड़ा पीछे।

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बेहतरीन अर्थव्यवस्था में झारखंड ने गुजरात जैसे औद्योगिक राज्य को पीछे कर दिया है। जूझते हुए हालात में भी आर्थिक रैंक में आश्चर्जनक तरीके से झारखंड ने लंबी छलांग लगाई है।
नीति आयोग द्वारा जारी राजकोषीय स्वास्थ्य इंडेक्स में चौंकाने वाली बात यह है कि खनिज संसाधनों से भरपूर उड़ीसा ,छत्तीसगढ़, गोवा और झारखंड का रिपोर्ट में शीर्ष प्रदर्शन करने वाले अचीवर बनकर उभरे हैं।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ट्विटर एक हैंडल पर लिखते हुए कहते हैं कि झारखंड अपने सभी संसाधन झारखंडियों के हित में इस्तेमाल कर लगातार आगे बढ़ रहा है। तो वहीं नगर विकास एवं आवास पर्यटन विभाग के मंत्री सुदीप कुमार सोनू अपने फेसबुक आईडी में लिखते हैं,
जोहार साथियों,
मा० मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन जी के संवेदनशील और दूरदर्शी नेतृत्व ने अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में राज्य को स्थायित्व प्रदान किया है। सहकारी संघवाद की अवधारणा को समाप्त करने वाली विचारधारा के दौर में यह उपलब्धि और बड़ी हो जाती है
राज्यकोषीय सेहत सूचकांक 2025 शीर्षक वाली रिपोर्ट में 18 प्रमुख राज्यों को शामिल किया गया है यह राज्य भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) जनसांख्यिकी, कुल सार्वजनिक व्यय, राजस्व एवं समग्र राजकोषीय स्थिरता में अपने योगदान के लिहाज से अर्थव्यवस्था को बड़े पैमाने पर संचालित करते हैं.
नीति आयोग की इस रिपोर्ट में झारखंड ने अपने राजकोषीय स्वास्थ्य में सुधार दिखाया है। इसने 2022-23 में चौथा रैंक हासिल किया, जो 2014-19 से 2021-2022 की अवधि में औसत रैंक 10 से काफी सुधार है। यह सुधार बेहतर राजस्व जुटाने, बढ़ी हुई राजकोषीय विवेकशीलता और मजबूत ऋण स्थिरता से संभव हुआ है। रिपोर्ट में पांच प्रमुख बिंदुओं व्यय की गुणवत्ता, राजस्व जुटाना, राजकोषीय विवेक, ऋण सूचकांक और ऋण स्थिरता के आधार पर 18 प्रमुख राज्यों में से टॉप 5 राजकोषीय स्वास्थ्य इंडेक्स पर नजर डालें तो पहले स्थान पर
ओडिशा कुल स्कोर- 67.8, रैंक – 1
छत्तीसगढ़ कुल स्कोर – 55.2 रैंक – 2
गोवा कुल स्कोर – 53.6 रैंक – 3
चौथे स्थान पर झारखंड जिसका कुल स्कोर 52.6 रैंक 4 पर है वहीं एक कदम पीछे गुजरात का कुल स्कोर 59.5, 5 रैंक पर है।
वही राजकोषीय विवेकशीलता सूचकांक में झारखंड पहले स्थान पर है। राजकोषीय विवेकशीलता का मतलब सरकारी वित्त के सावधानीपूर्वक प्रबंधन होता है। इसमें झारखंड पहले स्थान के साथ अचीवर राज्यों की श्रेणी में है।
रिपोर्ट में यह भी है कि राज्य में राजस्व व्यय के अंतर्गत प्रतिबद्ध ब्याज सबसे बड़ा हिस्सा है।

बेहतरीन अर्थव्यवस्था में झारखंड ने गुजरात जैसे औद्योगिक राज्य को पीछे कर दिया है। जूझते हुए हालात में भी आर्थिक रैंक में आश्चर्जनक तरीके से झारखंड ने लंबी छलांग लगाई है।
नीति आयोग द्वारा जारी राजकोषीय स्वास्थ्य इंडेक्स में चौंकाने वाली बात यह है कि खनिज संसाधनों से भरपूर उड़ीसा ,छत्तीसगढ़, गोवा और झारखंड का रिपोर्ट में शीर्ष प्रदर्शन करने वाले अचीवर बनकर उभरे हैं।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ट्विटर एक हैंडल पर लिखते हुए कहते हैं कि झारखंड अपने सभी संसाधन झारखंडियों के हित में इस्तेमाल कर लगातार आगे बढ़ रहा है। तो वहीं नगर विकास एवं आवास पर्यटन विभाग के मंत्री सुदीप कुमार सोनू अपने फेसबुक आईडी में लिखते हैं,
जोहार साथियों,
मा० मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन जी के संवेदनशील और दूरदर्शी नेतृत्व ने अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में राज्य को स्थायित्व प्रदान किया है। सहकारी संघवाद की अवधारणा को समाप्त करने वाली विचारधारा के दौर में यह उपलब्धि और बड़ी हो जाती है
राज्यकोषीय सेहत सूचकांक 2025 शीर्षक वाली रिपोर्ट में 18 प्रमुख राज्यों को शामिल किया गया है यह राज्य भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) जनसांख्यिकी, कुल सार्वजनिक व्यय, राजस्व एवं समग्र राजकोषीय स्थिरता में अपने योगदान के लिहाज से अर्थव्यवस्था को बड़े पैमाने पर संचालित करते हैं.
नीति आयोग की इस रिपोर्ट में झारखंड ने अपने राजकोषीय स्वास्थ्य में सुधार दिखाया है। इसने 2022-23 में चौथा रैंक हासिल किया, जो 2014-19 से 2021-2022 की अवधि में औसत रैंक 10 से काफी सुधार है। यह सुधार बेहतर राजस्व जुटाने, बढ़ी हुई राजकोषीय विवेकशीलता और मजबूत ऋण स्थिरता से संभव हुआ है। रिपोर्ट में पांच प्रमुख बिंदुओं व्यय की गुणवत्ता, राजस्व जुटाना, राजकोषीय विवेक, ऋण सूचकांक और ऋण स्थिरता के आधार पर 18 प्रमुख राज्यों में से टॉप 5 राजकोषीय स्वास्थ्य इंडेक्स पर नजर डालें तो पहले स्थान पर
ओडिशा कुल स्कोर- 67.8, रैंक – 1
छत्तीसगढ़ कुल स्कोर – 55.2 रैंक – 2
गोवा कुल स्कोर – 53.6 रैंक – 3
चौथे स्थान पर झारखंड जिसका कुल स्कोर 52.6 रैंक 4 पर है वहीं एक कदम पीछे गुजरात का कुल स्कोर 59.5, 5 रैंक पर है।
वही राजकोषीय विवेकशीलता सूचकांक में झारखंड पहले स्थान पर है। राजकोषीय विवेकशीलता का मतलब सरकारी वित्त के सावधानीपूर्वक प्रबंधन होता है। इसमें झारखंड पहले स्थान के साथ अचीवर राज्यों की श्रेणी में है।
रिपोर्ट में यह भी है कि राज्य में राजस्व व्यय के अंतर्गत प्रतिबद्ध ब्याज सबसे बड़ा हिस्सा है।

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