झारखंड मुक्ति मोर्चा के सुप्रीमो शिबू सोरेन का तबियत बिगड़ जाने पर उन्हें रांची से दिल्ली ले जाया गया, दिल्ली विशेष विमान से ले जाया जा रहा है। रांची स्थित आवास पर तबियत बिगड़ने पर उन्हें रांची के एक अस्पताल ले जाया गया जहां बताया गया कि सांस लेने में परेशानी हो रही है यह देखते हुए खुद सीएम हेमंत सोरेन उनके साथ दिल्ली के लिए रवाना हो गए।
शिबू सोरेन का संघर्ष
शिबू सोरेन के राजनीतिक शुरुआत कांटो से भरी हुई जीवन से है,
शिबू सोरेन जब 8 वीं में पढ़ रहे थे तभी उनके गांव नेमरा के भेड़ा नदी में पिता सोबरन सोरेन की हत्या महाजनों ने करवा दिया। सोबरन सोरेन एक सभ्य सामाजिक और पैसे से शिक्षक थे। 50 के दशक में महाजनों का भारी प्रकोप था। जिससे विक्षुब्ध होकर महाजनी शोषण और गांव में शराबबंदी के लिए आंदोलन चलाया, तो महाजनों ने उनकी हत्या 27 नवंबर 1957 करवा दी. इस समय सोबरन सोरेन अपने बेटे शिबू सोरेन के स्कूल हॉस्टल के लिए चावल लेकर जा रहे थे.
उस हत्याकांड के बाद उनकी मां सोनामणि पूरी तरह से हिल गई थी, अपने दोनों बेटे राजा राम सोरेन और शिबू सोरेन को संभालना, पति के हत्यारों को सजा दिलाने के लिए हजारीबाग कोर्ट का चक्कर लगाना। बहुत ही मुश्किल जीवन में भी कोर्ट का साथ नहीं मिलता देख निराश होकर एक संकल्प के साथ कोर्ट परिसर से विदा हुई कि बड़ा होने के बाद उनका बेटा ही इस अन्याय का प्रतिकार करेगा. और फिर कोर्ट तरफ़ नहीं देखी और यह सब देख बालक शिबू सोरेन के अंदर ज्वाला की लो ने अपनी बुनियाद डाल दिया था जिससे प्रभावित होकर और मां के परेशानियों को देखकर बचपन में ही संघर्ष का रास्ता चुना, जंगल से सुखी लकड़ी को माथे पर से लाकर बेचना और इसी दरम्यान में कई लोगों से मुलाकात होती गई जानकारी हासिल करता गया। ज्यादातर कम्युनिस्ट लोगों का साथ मिला और वहीं से आंदोलन की रणनीति को समझने लगे और अंततः धनकटनी आंदोलन ने शिबू सोरेन को नेता बना दिया।
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झारखंड मुक्ति मोर्चा का निर्माण
धनकटनी आंदोलन के साथ ही सनोद संथाल समाज की स्थापना और फ़िर झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना किया। विधायक, सांसद से लेकर मुख्यमंत्री तक का सफ़र तक तय किए।
शिबू सोरेन को दिशाेम गुरु शिबू सोरेन कहते हैं। प्रदेश में लोग दिशाेम गुरु और अब दिशाेम गुरु बाबा कहकर संबोधिक करते हैं।
बात करें दिशाेम गुरु शिबू सोरेन की तो श्री सोरेन का एक-एक पल का जीवन एक बड़ी कहानी है जिसपर कई किताबें लिखी जा सकती है। अबतक जितनी भी किताबें लिखी गई है संपूर्ण नहीं है। जितना भी आप इनके बारे में जानने के लिए अंदर जाएंगे समुद्र की तरह अंदर ही चलते जाएंगे जिसका कोई थाह नहीं है